छत्तीसगढ़ी प्रवासी मजदूर परिवार के तीन बच्चों की कुशीनगर (उ.प्र.) के एक भट्टे पर व्यवस्थागत आपराधिक लापरवाही से मौत पर LSU ने गंभीर सवाल उठाए ।
दिनांक 10-05-2026 को बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के अखबारों में यह खबर छपी कि, कुशीनगर (उ.प्र.) के ईंट भट्टे पर दिनांक 09-05-2026 बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिले के तीन प्रवासी मजदूर परिवार के बच्चों (3 वर्ष, 5 वर्ष, 9 वर्ष) की गड्ढे के पानी में डूबने से मौत हो गई।
👉 इस खबर को जानकर “लोक सिरजनहार यूनियन” (LSU) के अध्यक्ष लखन सुबोध ने स्थानीय संपर्क सूत्रों एवं कुशीनगर के सहमना मजदूर संगठन के साथियों से संपर्क किया।
👉 जानकारी मिली कि, इस घटना में ईंट भट्ठा मालिक की घोर अपराधिक लापरवाही सामने आई।

👉इस पर LSU की एक टीम 11-05-26 को पीड़ित के गांवों (अकलतरा के पास गांव बाना एवं बिलासपुर के पास गांव फरहदा) जाकर परिवार के लोगों से भेंट-चर्चा किया।
👉 पूरी जानकारी से मालूम हुआ कि, जानवरों के भी न रहने लायक झोपड़ी व परिस्थिति में मजदूर परिवार को रखा जाता है। वहां भट्ठा मालिक ने एक जगह पानी जमा करने जे.सी.बी. से गड्ढा खोदा था। (इसमें सुरक्षा के लिए कोई घेराबंदी नहीं था) इस गड्ढे में 4-5 फिट पानी भरा था। जिसमें बच्चों के गिरने-डूबने से मौत हो गई।
👉 अखबार में छपे अनुसार प्रति परिवार को चार लाख रुपए राहत राशि की घोषणा हुई है और जिला कलेक्टर द्वारा एक जांच बिठाई गई है।
👉इस पर LSU टीम ने परिवार जनों से पूछा कि, FIR की कापी दिखाएं कि, उसमे क्या और कैसी घटना होने की बात लिखी गई है, तो मजदूरों ने बताया कि, हमें अभी तक FIR की कापी नहीं दी गई है। हमारे लेबर एजेंट ने कहा कि, तुम लोग जाओ मैं इसे लेकर आऊंगा।
👉यह बहुत गंभीर आपराधिक लापरवाही की बात है कि, FIR नहीं लिखा गया है, तो जांच कैसे होगा? इस पर मजदूरों से टीम ने कुशीनगर में स्थानीय थाना का नं. मांगा और उस नंबर से श्री सुबोध ने बात किया तो बताया गया कि, अभी FIR नहीं लिखी गई है। और मजदूर रिपोर्ट लिखाना नहीं चाहते। तब श्री सुबोध ने कहा कि, यह तो सरासर, गैरकानूनी है। पुलिस की जिम्मेदारी है कि, वे FIR दर्ज करे और पूरी जांच, पड़ताल करे। इस पर उन्होंने फोन पर बातचीत बंद करते कहा कि, इसे उच्च अधिकारी बता सकते हैं कि, क्या होगा या नहीं होगा।

👉 मजदूरों को राहत राशि भी प्राप्त नहीं हुई है। परिवार सहित डेड बॉडी को पहुंचाने (एक तरह से कुशीनगर में रहने से बवाल होने की बात से कि, डेड बॉडी यहां न रहे, सोचकर ही) पचास-पचास हजार रुपए दिया गया है।
👉 मजदूरों को उनकी मजदूरी राशि भी वहां इतनी ही मात्रा की राशि से अधिक में भट्ठा मालिक के पास लेना है। एक तरह से मजदूरों को कुछ नहीं मिला है! वे बेगारी करने गए थे और अपने बच्चों को खोकर आए हैं।
👉यह स्थिति माननीय सुप्रीम कोर्ट में “ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश शासन” निर्णय के अनुसार उल्लेखित है कि, संज्ञेय अपराध की सूचना होने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
👉 कानून व्यवस्था एवं मानवता की दृष्टि से यह आवश्यक है कि, पुलिस प्रशासन तत्काल स्वत: संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करे, निष्पक्ष जांच कराए तथा यह सुनिश्चित करे कि, यदि किसी प्रकार की लापरवाही असुरक्षित गड्ढा, सुरक्षा प्रबंधों की अनदेखी एवं श्रमिक परिवारों की उपेक्षा सामने आती है, तो दोषियों पर कठोर कार्यवाही हो।
👉LSU विगत कई वर्षों से प्रवासी मजदूरों के अधिकार, सम्मानजनक आवास, श्रमिक सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा-शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा के प्रश्नों पर कार्यरत है।
👉 लेकिन सरकार द्वारा इसकी अनदेखी-लापरवाही के कारण लगातार दुर्घटनाओं एवं मानवीय त्रासदियां सामने आ रही है।
👉LSU ने तय किया है कि, यदि इन सब मसलों पर उचित कार्यवाहियां नहीं की जाती है तो हम NHRC (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग), बाल अधिकार आयोग एवं न्यायालय की शरण लेने हेतु बाद्ध्य होंगे।
👉LSU मांग करता है कि :—

(1) तत्काल FIR दर्ज कर उसकी प्रति पीड़ित परिवारों को उपलब्ध कराई जावे।
(2) प्रत्येक प्रभावित परिवार को 20 लाख रुपए की राहत मुआवजा और परिवार के प्रमुख को स्थाई रोजगार दी जाय।
(3) गड्ढा खुला था, बच्चों के लिए सुरक्षित क्षेत्र नहीं था, तो यह केवल दुर्घटना नहीं अपराधिक लापरवाही का मामला बनता है और इस पर कठोर कार्यवाही की जावे।
(4) प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी व स्कूल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं करने/हनन करने (14 वर्ष तक शिक्षा पाने के संवैधानिक अधिकार) का हनन करने पर मुकदमा दर्ज हो।
(5) भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु श्रमिक स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुरक्षित किया जाय।
(6) मृत बच्चों के परिवारों को घोषित मुआवजा राशि संबंधी आदेश स्वीकृत की आधिकारिक जानकारी प्रदान की जावे।
(7) क्या संबंधित प्रवासी मजदूर परिवारों का श्रम विभाग का पंजीयन, लेबर एजेंट (सरदार) का लाइसेंस आदि की जानकारी सार्वजनिक की जाय।
🙏साथियों,
यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गरीब मजदूर परिवारों की सुरक्षा एवं अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। यह सिर्फ एक दुर्घटना ही नहीं व्यवस्था की विफलता है। आवाज़ बुलंद करें :—
📢 गये थे रोटी की तलाश और लेकर आए मासूमों की लाश
📢 सिर्फ मुआवजा ही नहीं व्यवस्था की जवाबदेही भी चाहिए
📢 प्रवासी मजदूरों के बच्चों को सुरक्षा, शिक्षा और जीवन का अधिकार दो
📢 गरीबी शोषणकारी व्यवस्था की उपज है कोई श्राप-अभिशाप नहीं
दिनांक:- 12-05-2026
संलग्न:-संदर्भित फोटोग्राफ जारीकर्ता *वीरेंद्र भारद्वाज* (महासचिव LSU) मो.नं.:- 8717834059

