कांशीराम साहब जी के 18 वी महापरिनिर्वाण दिवस 9 अक्टूबर 2006 को वे महापरिनिर्वाण प्राप्त हुए ।
➡️ मान्यवर साहब कांशीराम जी का जन्म : 15 मार्च 1934 को ख्वासपुरा , रोपड़ जिला ( पंजाब ) में हुआ था ।
➡ सन् 1956 की घटनाएं :
➖1956 में मान्यवर साहब कांशीराम जी ने : उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिये स्टाफ कालेज देहरादून में दाखिला लिये ।
➖संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी करते हुये, कुछ समय तक भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग देहरादून में नौकरी भी किये ।
➖6 दिसंबर 1956 को बाबा साहब डॉ.अंबेडकर के महापरिनिर्वाण से :
▪मान्यवर साहब का एक सहयोगी मित्र ” श्री ग्यानी “ , तीन दिन तक गहरे शोक में डूबा रहा ।
▪मान्यवर साहब को 32 वर्ष के उम्र में : बाबा साहब के बारे में जानने का मौका मिला ।
➡ सन् 1963-64 में : पूना स्थित ” सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मिलिट्री एक्सप्लोसिव “ में घटित घटना :
➖ मान्यवर साहब साइन्टिफिक आफिसर पद पर कार्यरत थे।
➖मैनेजमेंट द्वारा : डॉ.अम्बेडकर जयंती व बुद्ध जयंती की छुट्टी निरस्त किया गया ।
➖मि दीनाभाना द्वारा विरोध किया गया और मैनेजमेंट ने उनको सस्पेंड कर दिया ।
➖मान्यवर साहब ने मि दीनाभाना का सहयोग कर, न्यायालय से : मि दीनभाना का सस्पेंशन हटा । साथ ही छुट्टियाॅ भी बहाल हुई ।
➖मान्यवर साहब को बाबा साहब के बारे में जानने की लालसा पैदा हुई ।

➖मान. डी के खापर्डे जी द्वारा प्राप्त पुस्तक ” THE ANNIHILATION OF CASTE ( जात-पात का संपूर्ण विनाश )” पुस्तक ने मान्यवर साहब के जीवन को ही मोड़ दिया
➖ जानना जरूरी है ,कि बाबा साहब ने : ” The Annihilation of Caste “ अपने चौथे गुरू Prof John Dewey के पुस्तक ” Democracy In Education “ के आधार पर तैयार किये थे ।
➡ सन् 1965 में : मान्यवर साहब ने अपनी माॅ बिशन कौर जी को एक चौबीस पन्ने का लंबा पत्र लिखे :जिसमें उन्होंने अपने जीवन के लक्ष्य रेखांकित कये : उन्होंने लिखे – – –
➖मैं अब विवाह नहीं करूंगा ।
➖घर या परिवार नहीं बसाऊंगा ।
➖विवाह हो या मृत्यु , घर परिवार के किसी भी कार्यक्रम में शरीक नहीं होऊंगा ।
➖व्यक्तिगत रूप से मेरी कोई निजी संपत्ति नहीं होगी ।
➖बहुजन समाज ही अब मेरा परिवार है ।
➖घर वालों के लिए मैं मर चुका हूं ।
” साथ ही उन्होंने विनम्रतापूर्वक माफी मांग कर अपनी सगाई भी तोड़ दी ।”
🔹मान्यवर साहब अपने इस निश्चय के प्रति इतने कठोर थे कि अक्टूबर 1983 में अपने पिता मान. हरिसिंह जी के देहांत पर भी वे अपने गांव नहीं लौटे, अंत्यसंस्कार में भी वे शरीक नहीं हुये ।
➡ मान्यवर साहब ने : बाबा साहब के मिशन को बारीकी से जानने / समझने व पुनर्जीवित करने का लक्ष्य निर्धारित किये :
➖सन् 1966 में आर पी आई के विभिन्न धड़ों से एक बात उभर कर आई :
” बाबा साहब व अन्य महामानवों के विचारधारा तो ठीक है , लेकिन कामयाब हो सकत नाहीं ।”
➖पहले तो , विभिन्न प्रकार से इनको सहयोग करने के प्रयास किए , लेकिन बात बनती नजर नहीं आयी ।
➖उद्देश्य की प्राप्ति के लिए :

▪6 दिसंबर 1973 को बामसेफ की शुरुआत किया गया ।
▪6 दिसंबर 1978 को BIRTH OF BAMCEF ( BACKWARDS AND MINORITIES COMMUNITIES EMPLOYEES FEDERATION ) दिल्ली में आयोजित हुआ ।
▪️ अंबेडकरवाद की स्थति को समझने के लिए उन्होंने :
1 ) – 14 अप्रैल 1979 से 14 जून 1979 तक :
” Will Ambedkarism Revive and Survive .” पर सेमिनार विभिन जगहों पर ।
2- १४ अप्रैल १९८० से १४ जून १९८० तक :
” Ambedkar Mela on Wheels .”
९ राज्यों के ३४ जगहों पर मेला वाहन के माध्यम से पहुंचकर बाबा साहब व उनके मिशन के बारे में जानकारियां दी गई ।
▪6 दिसंबर 1981 को DS4 ( DALIT SOSHIT SAMAJ SANGHASH SAMITI ) की स्थापना हुई ।
▪8 अक्टूबर 1981 को BRC ( BOUDH IST RESEARCH CENTRE ) की स्थापना हुई ।
➡️ 24 सितंबर 1982 को पूना पैक्ट धिक्कार दिवस का भी एक ऐतिहासिक महत्व है ।
▪14 अप्रैल1984 को BSP ( BAHUJAN SAMAJ PARTY ) की स्थापना हुई ।
➡ पूरे देश में बहुजनों का अस्तित्व बनने की प्रक्रिया शुरू हुई :
➖सन् 1984 के लोकसभा के आम चुनाव बसपा ने अपने दमखम से लड़ा ।
➖ खुद मान्यवर साहब कांशीराम जी ने जांजगीर , छत्तीसगढ़ से लोक सभा चुनाव १९८४ में लड़े थे ।
➖हर चुनाव को अवसर के रूप में दमखम से लड़ने की प्रक्रिया की शुरुआत हुई ।
➡ 19 दिसंबर 1985 को : बिजनौर लोकसभा उपचुनाव , बसपा के राजनीति में मील का पत्थर साबित हुआ :
➖तत्कालीन सातो मनुवादी राष्ट्रीय पार्टियों का सम्मिलित प्रयास : बसपा को राजनीति से बाहर करना था ।
➖योजनाबद्ध तरीके से कांग्रेस ने : ” बाबू जगजीवन राम के माध्यम से कांशीराम का मुकाबला “ का प्रयोग :
▪मि अरूण सिंह उन पांच लोगों की कमेटी में एक थे , जिन्होंने बिजनौर संसदीय चुनाव में कांग्रेस ( आई ) के उम्मीदवार रूद्रदेव को बदल कर मीराकुमार को खड़ा करने का निर्णय लिया ।
▪बाबू जगजीवन राम की पुत्री मीराकुमार को मैदान में उतार कर कांग्रेस ( आई ) तथा मि अरूण सिंह यह उम्मीद पाले थे कि , ” दलित शोषित की आवाज को कुचल दिया जाएगा ।”
▪इसी कारक को ध्यान में रखते हुए सभी छह विपक्षी राष्ट्रीय पार्टियों ने मिलकर मि रामविलास पासवान को संयुक्त उम्मीदवार बिजनौर लोकसभा उपचुनाव में बनाया । यथास्थितिवादियों की नुमाइंदगी करने वाली ” मुसलिम मजलिस “ का समर्थन , बी एस पी के रूप में परिवर्तनवादी शक्तियों को परास्त करने के लिए किया गया ।

➖दोनों ही सत्ता पक्ष तथा विपक्षी पार्टियों ने बी एस पी के आधार को कुचलने के लिये दोनों ही दिग्गजों बाबू जगजीवन राम तथा रामविलास पासवान को मैदान में उतार दिया ।
➖बी एस पी द्वारा लड़े जा रहे इस परोक्ष युद्ध में सबसे घटिया तरीके के ब्लेकमेलिंग ( प्रेस में आया : मायावती का एक्सीडेंट हो गया, बचने की उम्मीद नहीं है ।मायावती कांग्रेस के पक्ष में बैठ गई है – – – आदि ) का भी मुकाबला करना पड़ा ।
➡मान्यवर साहब कांशीराम जी का ” APPEAL & WARNING LETTER – निवेदन एवं चेतावनी पत्र “ दिनांक : 1 दिसंबर 1985 : –
➖बिजनौर लोकसभा उपचुनाव : हार व जीत की लड़ाई नहीं बल्कि अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है ।
➖APPEAL ( निवेदन )- पांच दिन ( 12 दिसंबर 1985 से 16 दिसंबर 1985 तक ) , Full blooed support with :
▪पांच हजार समर्पित कार्यकर्ता :
👉250 कि. मी. के दायरें से आसानी से आ सकते हैं ।
▪पांच लाख रुपये की व्यवस्था , जिसकी तैयारी की जा सकती है :
👉100 आदमी – से पांच पांच हजार ।
👉500 लोग – एक एक हजार दे सकते हैं ।
👉 1000 लोग – पांच पांच सौ दे सकते हैं ।
👉 5000 हजार लोग – सौ सौ रुपए दे सकते हैं ।
👉कूपन के द्वारा कम रकम ले कर भी व्यवस्था किया जा सकता ।
➖ WARNING ( चेतावनी ) : 18 दिसंबर 1985 को अंतिम निर्णय :
▪पांच हजार समर्पित कार्यकर्ता तथा पांच लाख की व्यवस्था होने से ही अगुवाई के लिए तैयार ।
▪पांच हजार समर्पित कार्यकर्ता व पांच लाख रुपये व्यवस्था नहीं होने पर अगुवाई नहीं करना बल्कि पीछे की लाइन में चला जाना ।
➖इस पत्र में मान्यवर साहब कांशीराम जी ने : UP HILL TASK का भी जिक्र किये हैं :

▪पहाड़ी में खड़ा रहने के लिए भी ताकत लगाने की जरूरत पड़ती है , अन्यथा धड़ाम से नीचे गिरना पड़ता है ।
▪पहाड़ी में ऊपर चढ़ने के लिए दूसरा बल लगाना जरूरी होता है ।
▪बाबा साहब ने अपने लेफ्टिनेंट को सलाह दिये थे :
” सामाजिक क्रांति के कारवाॅ को बड़ी मुश्किल से मैं यहाॅ तक ला पाया हूं । किसी भी हालत में पीछे जाने नहीं देना ।अगर आगे न ले जा पाओ तो, जहाॅ पर आया है, वहीं पर रोके रखना ।”
यही UP HILL TASK CONCEPT है। रोक कर रखने के लिये भी ताकत लगाने की जरूरत होती है ।
➡ मान्यवर साहब कांशीराम जी के APPEAL & WARNING LETTER से सीख व सबक :
➖संगठन के हर स्तर के नेतृत्व कर्ता को अपना लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी हो जाता है :
▪लक्ष्य निर्धारण के लिए SWOT ANALYSIS ( स्वाट विश्लेषण ) करते आना चाहिए ।
▪TRANSIONAL ANALYSIS ( वार्तालाप विश्लेषण ) का ज्ञान हो ।
▪PERSONALLY (व्यक्तित्व ) का बड़ा महत्व होता है ।
➖समय बद्धता (TIME BOUND PROGRAMME ) हो ।
➖नेतृत्व करने के लिए निर्धारित समय में लक्ष्य को पूरा करना जरूरी है :
▪लक्ष्य पूरा नहीं कर पाने की स्थिति में, अपने आप को पीछे कर लेना चाहिए । दूसरे को नेतृत्व का मौका देना चाहिए ।
➖मान्यवर साहब के सिद्धांत को व्यवहारिक बनाने की जरूरत है ;

▪MAXIMUM OF THE MINIMUM .
कुछ लोगों को ज्यादा से ज्यादा त्याग करने की जरूरत है ।
▪MINIMUM OF THE MAXIMUM .
ज्यादा लोगों को कम से कम त्याग करना ही पड़ेगा ।
➡बिजनौर लोकसभा उपचुनाव का लक्ष्य की प्राप्ति हुई :
➖मान्यवर साहब कांशीराम जी के APPEAL & WARNING LETTER का आशातीत असर हुआ :
▪पांच हजार समर्पित कार्यकर्ता और पांच लाख रुपये की व्यवस्था निर्धारित समय में पूरा हो गया ।
▪मान्यवर साहब पीछे नहीं हटे, नेतृत्व प्रदान करते रहे ।
➖बिजनौर लोकसभा उपचुनाव के नतीजे से लक्ष्य की प्राप्ति हो गई :
➖ तत्कालीन सातो मनुवादी राष्ट्रीय पार्टियां मिल कर भी बहुजनों के अस्तित्व को कुचल नहीं पाये :
▪इकसठ हजार से अधिक वोट बसपा को मिला, जो उस क्षेत्र के अनुसूचित जाति के @ 80% वोट था ।
▪मनुवादी प्रेस को भी मुख पृष्ठ में समाचार देना पड़ा ।
▪सबसे ज्यादा पत्रकार वार्ता मान्यवर साहब का हुआ ।
▪बिजनौर लोकसभा
उपचुनाव, बसपा को राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ और 1996 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया ।
➡मान्यवर साहब ने अपने साथ ही समस्त केडर्स को भी सचेत किये :
➖ THE OPPRESSED INDIAN का जनवरी अंक का संपादकीय आज भी पढ़ने व चिंतन करने की जरूरत है :
▪बी एस पी का उत्कृष्ट समय :
” इडिया टुडे “ का विचार –

” उल्कापिण्ड ( Shooting Star ) के चमक की तरह बी एस पी का उभार ।”
➖THE OPPRESSED INDIAN का फरवरी – मार्च 1986 अंक का संपादकीय आज भी प्रासंगिक प्रतीत होता है :
▪” ब्लेकमेलिंग के लिये तैयार रहें (BE PREPARED FOR BLACKMAILING .”
👉 मान्यवर साहब ने मुखपृष्ठ पर अपना फोटो छापे व उसके नीचे लिखे :
PRESIDENT – BAMCEF , DS4 , BSP : BE PREPARED FOR BLACKMAILING .
👉बिजनौर लोकसभा उपचुनाव के बाद मनुवादियों द्वारा संभावित ब्लेकमेलिंग के लिए आगाह किये ।
👉 BLACKMAILING के प्रकार हो सकते हैं :
1 – CHARACTER ASSASINATION ( चारित्रिक हनन )
विभिन्न मौकों पर विभिन्न प्रकार से ।
( कांग्रेस ने मान्यवर साहब के शेडो संगठन को आखिर नुकसान पहुंचा ही दिया । )
2 – ILL WILL ATTACH ( दुर्भावनाजनित आक्रमण )
कार्यकर्ताओं में आपस में विभिन्न स्तर पर दुर्भावना पैदा करना, जिससे संगठन की ऊर्जा को जाया किया जा सके
➡️ सन् १९८७ में मान्यवर साहब ने इंडियन एक्सप्रेस को साक्षात्कार के दौरान बोले थे :
” मेरे सपनों का भारत , सम्राट अशोक का भारत । “ निश्चित रूप से मान्यवर साहब का : *APPEAL & WARNING LETTER* तथा उसके जुड़े *विभिन्न पहलुओं* से *सीख व सबक* लेकर मिशन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में *अपेक्षित सहयोग* प्राप्त होगा ।

➡️ 14 जून 2003 को : बंगलोर में , P B S P ( Pay Back to Society Program ) के आयोजन में उनका ऐतिहासिक मार्ग दर्शन हुआ था । ( जिसमें नौ राज्यों से @ १००० कर्मचारी स्वयं के बलबूते पर भाग लिये , जिससे साहब का मनोबल बढ़ा था ।साथ ही पी बी एस पी को National Level तक ले जाने की इच्छा भी जाहिर किए थे । )
➡️ २५ जुलाई २००३ को लखनऊ में आयोजित विशाल सभा में भाजपा से संबंध तोड़े थे ।
➡️ १५ सितम्बर २००३ को , हैदराबाद में उनका अंतिम कार्यक्रम रहा । उसके बाद उनका ब्रेन हेमरेज हो गया था ।
➡️ 9 अक्टूबर 2006 को वे महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए ।

