देवी भागवत पुराण को सुनने से आध्यात्मिक विकास होता है –पं. ओमप्रकाश शर्मा, सार्वजनिक संगीतमय श्रीमद् भागवत नावान्ह ज्ञान यज्ञ कथा का समापन

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बेलतरा :- श्रीमद् देवी भागवत पुराण में जगतजननी देवी जी की आराधना, उनके गुण, शक्ति, और प्रकृति निर्माण के बारे में बताया गया है। यह पुराण शक्तिवाद की प्रमुख रचनाओं में से एक है। शक्तिवाद, हिंदू धर्म की एक शाखा है जो देवी महात्म्य और दिव्य स्त्री की पूजा पर केंद्रित है। देवी भागवत पुराण के बारे में कुछ खास बातें को व्यास पीठ से आचार्य पं. ओमप्रकाश महाराज द्वारा बताया गया कि यह पुराण 18 हज़ार श्लोक, 335 अध्याय, और 12 स्कंधों में बंटा है। देवी भागवत पुराण में बताया गया है

कि देवी, संसार की नींव और ब्रह्म, सर्वोच्च सत्ता के समान हैं। देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि तीनों देवताओं को देवी ने अपनी इच्छा शक्ति से उत्पन्न किया था। देवी भागवत पुराण के बीज मंत्र का जाप ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मनसा देव्यै स्वाहा’ है। देवी भागवत पुराण को सुनने से आध्यात्मिक विकास होता है और भगवान के प्रति भक्ति गहरी होती है। देवी भागवत पुराण को नवरात्रि में सुनना बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है।


सार्वजनिक संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत नावान्ह ज्ञान यज्ञ कथा कार्यक्रम बेलतरा के सागर पारा में दिनांक 3 अक्टूबर 2024 से प्रारंभ हुआ जिसमें प्रतिदिन कथा का वृतांत व्यास पीठ से आचार्य पंडित ओमप्रकाश द्वारा सत्यव्रत चरित्र, राम, कृष्ण कथा देवी उत्पत्ति, महिषासुर उद्धार, शम्भु, निशुम्भ उद्धार, नहुष कथा, हयग्रीष कथा


नारद मोह, सुकन्या चरित्र मान्धाता, त्रिशंकु, हरिशचन्द्र कथा, लक्ष्मी, गंगा, सरस्वती अवतरण कथा गायत्री सहस्त्रनाम, एवं आज कथा विश्राम किया गया।
परायण करता पंडित अभिषेक अरुण शर्मा, मुख्य यजमान के रूप में विमल धीवर – श्रीमती खुशबू धीवर,एवं अनिश धीवर – श्रीमती दामिनी धीवर है। कार्यक्रम में सहयोगी के रूप में समस्त ग्रामवासी रहे।

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