पति को पतन की रास्ता जाने से रोकना पत्नी धर्म- पंडित मिथिलेश शर्मा
पति को पतन की रास्ता जाने से रोकना पत्नी धर्म- पंडित मिथिलेश शर्मा
पवन मिरी के साथ राधेश्याम कोरी की खास रिपोर्ट…
बेलतरा :- बेलतरा जायसवाल परिवार में हो रहे श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिवस में व्यास पीठ से पंडित मिथिलेश शर्मा कथा का वृतांत कहते हुए बताते हैं कि पत्नी चाहे तो पति को पतन की रास्ता जाने से रोक सकती है। कथा को वृतांत रुप से बताते हुए भक्त प्रहलाद कथा को श्रवण कराया।

भक्त प्रहलाद की माता का नाम कयाधु था, जो राक्षस राज हिरण्यकश्यप की पत्नी थी, एवं हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष की माता का नाम दिती एवं पिता का नाम कश्यप ऋषि थे।भक्त प्रहलाद भगवान श्री हरि नारायण के अनन्य भक्त थे, और इधर हिरण्यकश्यप अपने आप को भगवान मानता था कहता था मैं ब्रह्मा जी की और तपस्या कर उनसे वरदान प्राप्त किया कि उनकी मृत्यु ना दिन में हो ना रात में ना ऊपर ना नीचे ना धरती पर ना अंबर में ना अस्त्र से ना शस्त्र से ना दैत्य से ना देवता से अर्थात अजय एवं अमर रहना चाहता था। ब्रह्मा जी से वरदान पाकर हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान घोषित करना चाहता था, परंतु भक्त पहलाद तो भगवान श्री विष्णु हरि नारायण के भक्त थे, हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को अनेकों अनेक यातनाएं दी मृत्युदंड देने की कोशिश की आखिरकार वो नाकाम रहा अंत में उसने भक्त पहलाद को एक खंबे से बांध दिया और कहा कि तेरा नारायण इस खंबे में भी है, भक्त पहलाद ने कहा कि भगवान श्री विष्णु हरि नारायण हर जगह कण-कण में हैं तुझ में मुझ में सब मनुष्य में विद्यमान हैं, इससे हिरण्यकश्यप का क्रोध और अधिक बढ़ गया तथा उसने कहा कि क्या इस खंबे में भी नारायण है कहते हुए धारदार खंड़क पर प्रहार किया और उसमें से भगवान श्री विष्णु हरि नारायण के अवतार भगवान श्री नरसिंह प्रकट हुए, जिस समय भगवान श्री नरसिंह प्रकट हुए वह समय संध्या बेला का था, और भगवान श्री नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को चौखट एवं देहरी पर ले जाकर अपने दोनों पैरों पर लिटा लिया और कहा कि अब ना दिन है रात ना अंबर है ना धरती, ना बाहर है,ना भीतर, में ना देत्य हूं ना देवता, में ना मानव हूं ना पशु, में नरसिंह हूं।इतना कहकर भगवान नरसिंह अपने नखों से हिरण्यकश्यप का वध कर दिया। इस प्रकार भक्त पहलाद भगवान श्री विष्णु हरि नारायण के अनन्य भक्त बन गए अर्थात कथा का सारांश यह कहता है ईश्वर पर हम सच्ची आस्था विश्वास के साथ रखें तो कण-कण में भगवान विद्यमान है।

