श्रीमद्भागवत कथा से भक्ति, त्याग और ईश्वर की कृपा होती है -पं गौरव जोशी
श्रीमद्भागवत कथा से भक्ति, त्याग और ईश्वर की कृपा होती है- पं गौरव जोशी
श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य तीसरा दिवस
बिलासपुर- नेवसा में कश्यप परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन का आयोजन अत्यंत भव्य और भक्तिमय वातावरण में हुआ। महाराज गौरव जोशी जी ने श्रद्धालुओं को भक्त प्रह्लाद, विदुर, सती चरित्र और भगवान नरसिंह अवतार की पावन कथाएँ सुनाईं। महाराज जी ने बताया कि भक्त प्रह्लाद की भक्ति अडिग थी,

जिसे देखकर स्वयं भगवान विष्णु को नरसिंह अवतार धारण करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति कभी हारती नहीं, भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। विदुर चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज जी ने समझाया कि सच्ची भक्ति का मापदंड वैभव नहीं, बल्कि हृदय की शुद्धता है। श्रीकृष्ण ने राजमहल छोड़कर विदुर के घर जाकर भोजन किया, क्योंकि विदुर का प्रेम निश्छल था।

महाराज जी ने सती चरित्र सुनाते हुए कहा कि माता सती ने अपने पति भगवान शिव के अपमान को सहन न करते हुए योगाग्नि में देह त्याग दी, जिससे दक्ष यज्ञ का विध्वंस हुआ। इसके बाद शिव-पार्वती विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर भक्त भावविभोर हो गए। महाराज जी ने बताया कि भगवान नरसिंह ने प्रह्लाद की रक्षा के लिए हिरण्यकशिपु का वध किया, जिससे यह सिद्ध होता है कि जब-जब अधर्म बढ़ेगा, भगवान अवश्य अवतार लेंगे। भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु झूम उठे और महाराज जी ने सभी को संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं।

