श्रद्धा के नाम पर टैक्स,बीफ को टैक्स फ्री– भाजपा का चेहरा बेनकाब ,” गरीब के रसोई को फायदा या पूजा पाठ करने वाले श्रद्धालू पर टैक्स “
श्रद्धा के नाम पर टैक्स– बीफ को टैक्स फ्री — भाजपा का चेहरा बेनकाब हुआ–
” ग़रीब के रसोई को फ़ायदा या पूजा पाठ करने वाले श्रद्धालु पर श्रद्धा टैक्स ? “
ज़िला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने जीएसटी 0.2 रिफार्म पर भाजपा के केंद्र सरकार पर जनता को लूटने और उद्योगपतियो को लाभ पहुंचाने के नाम पर जोर दार हमला किया ।
विजय केशरवानी ने कहा
जीएसटी के नाम पर – पहले जमकर लूट और अब छूट का सियासी नौटंकी, सरकार काे आम आदमी के साथ गाँव ग़रीब की चिंता ही नहीं
जीएसटी रिफार्म के नाम पर भाजपाई मना रहे उत्सव,
उन्होंने कहा आम आदमी की हालत में अब तक नहीं हुआ सुधार,महंगाई की मार से कराह रही है जनता ?

आदरणीय पत्रकार बंधुओं
जीएसटी रिफार्म के नाम पर केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार जिस तरह उत्सव मना रही है, किसी की समझ में यह बात आ ही नहीं रही है। उत्सव मनाने वाली कौन सी बात हो गई। क्या ग़रीब के रसोई को फ़ायदा हुआ या पूजा पाठ करने वाले श्रद्धालु को ?
श्रद्धा के नाम पर टैक्स, सब्जी बाजार चले जाइए, किराना दुकान में रोजमर्रा की चीजें खरीदारी करने वाले हो या फिर जिस घर में मरीज हो और उनको हर महीने दवा की जरुरत पड़ती है। उन घरों में जाकर पूछिए,जीएसटी ने उनके घरों के बजट को किस तरह धराशायी कर दिया है।
विजय ने कहा पहले आम आदमी के रसोई , बच्चों की पढ़ाई से लेकर कफ़न तक पर जीएसटी के नाम पर जमकर लूट किया गया और अब छूट की नौटंकी की जा रही है ,
जीएसटी के नाम पर केंद्र व राज्य सरकार ने आम आदमी पर एकसाथ दो-दो टैक्स थोप दिया था , सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी। घर में आए मेहमानों को होटल में भोजन कराने जाने से पहले मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों को काफी कुछ सोचना पड़ता है। एक बार होटल में भोजन कराने का मतलब एक सप्ताह या फिर पूरे पखवाड़े तक बजट को संतुलित रखना पड़ता है। यह स्थिति अब भी वैसी ही बनी हुई है।
विजय केशरवानी ने कहा आम आदमी के हालात में अब तक सुधार नहीं हुआ है। जीएसटी रिफार्म का फायदा किसे मिल रहा है। यह भी एक बड़ा सवाल है? नवरात्रि का पर्व चल रहा है। पूजा पाठ की सामग्री पर तो रिफार्म का असर अब तक दिखाई नहीं दिया है। एक नारियल की कीमत 35से 40 रुपये के करीब है। शर्मनाक बात है, श्रद्धा पर भी केंद्र व भाजपा की सरकार टैक्स पर टैक्स लगाए जा रही है।
उत्सव किसके लिए है। उत्सव से लाभ किस वर्ग को हो रहा है।
सब्जी व फल बाजार चले जाइए। सब्जियों और फल के दाम सुनने के बाद सीधे नजर जेब पर चली जाती है। जेब में रखे पैसे सब्जियों और फल के दाम सुनकर वह सब खरीदने की आजादी नहीं देता है जो आप घर से सोचकर निकलते हैं। सब्जियां खरीदनी भी जरुरी है, विवशता ऐसी कि बजट आपको आजादी नहीं देता है। इनकी विवशता को उत्सव मनाने वाले क्यों नहीं समझ रहे हैं। किराना दुकान और सब्जी मार्केट पहुंचकर भाजपा के मंत्री व नेताओं को लोगों से मिलना चाहिए, तब हकीकत सामने आएगी।
विजय केशरवानी ने कहा
छत्तीसगढ़ के साथ ही देशभर में एक अलग तरह का माहौल चल रहा है। अजीबो-गरीब और अपने आप में अजूबा साहै, देश की जनता और छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता पर साल 2017 से लेकर अबतक जीएसटी की करारी चोट पहुंचाने वाली केंद्र की भाजपा सरकार ने आम आदमी से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार पर ऐसे आर्थिक चोट पहुंचाई जिससे आज तक आम आदमी उबर नहीं पा रहे हैं। खाने के सामान रोटी दाल आटा तेल आदि से लेकर जरुरी उपयोग की चीजें, सभी में टैक्स जीएसटी। यह जीएसटी ना होकर केंद्र सरकार का चक्का टैक्स हो गया है। विजय केशरवानीने कहा कि इस गब्बर सिंह टैक्स से विद्यार्थी भी अछूता नही है
स्कूल के बच्चों की कॉपी में जीरो परसेंट जीएसटी की छूट देकर वाहवाही लूटने वाले लोग पेपर मिल के कागज पर १२ परसेंट से १८ परसेंट जीएसटी करने से स्कूल के बच्चों की नोट बुक कॉपी और भी माँगी हो हुई है ,
इसके साथ ही विशेष रूप से ट्रांसपोर्ट चार्ज बढ़कर १२ परसेंट से १८ परसेंट करने से सभी वस्तुयें अपने आप और भी महँगी हो गयी है !
जीएसटी की बाध्यता किसने की, टैक्स पटाने की अनिवार्यता केंद्र की भाजपा सरकार ने ही देश की जनता के सामने जीएसटी के रूप में लाई है। लाखों करोड़ों रुपये जीएसटी के नाम पर वसूलने, आम आदमी से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ने के बाद भाजपा सरकार की चालाकी देखिए।
चालाकी कहें या फिर बेशर्मी। पहले तो जीएसटी के नाम पर लोगों की जेबें काटी गई,फिर कमाई पर डाका डाला और अब आम आदमी की हितैषी बनने का ढाेंग कर रही है। पहले जीएसटी के नाम पर जीभर कर लुटा और अब कमी कर वाहवाही बटोरने का काम कर रही है।
0 ये कैसा उत्सव, कौन हो रहे शामिल,किसे मिल रहा फ़ायदा
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जीएसटी रिफार्म के नाम पर भाजपा के मंत्री से लेकर नेता उत्सव मना रहे हैं। आम जनता के लिए ऐसा क्या कर दिया कि उत्सव मना रहे हैं। पहले तो जीभर कर लूटा और उसी में कुछ पैसे लौटाने का ढोंग रच रही है। जीएसटी तो भाजपा सरकार ही २०१७ में लायी है अब उत्सव इस तरह का की जैसे जीएसटी कांग्रेस की सरकार लायी थी!
0 बिजली बिल को भी उत्सव में शामिल कर लेते
जिला अध्यक्ष ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने आम आदमी से लेकर किसानों को राहत देते हुए बिजली बिल हाफ योजना लेकर आई थी। इससे सभी वर्गों को राहत मिल रही थी। भाजपा सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया है। इससे आम आदमी की परेशानी बढ़ गई है। चार से पांच गुना बिजली बिल बढ़ गया है। बिजली बिल ने लोगों के घरों का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। अच्छा होता राज्य सरकार ने इसे भी उत्सव में शामिल कर लेती।
विजय केशरवानी ने कहा कि जीएसटी के दायरे में आम जनता की जरूरतों की चीजों को क्यो अलग रखा गया है ? बिजली बिल, पेट्रोल-डीजल, घरेलू गैस केरोसिन, को छोड़ा गया है ,इसलिए कि इसकी आपूर्ति प्रधानमंत्री के मित्र उद्योगपति करते है?
विजय केशरवानी ने कहा कपड़े पर जीएसटी 5% कर दिया गया पर धागा पर जो पहले 12% था बढ़ाकर 18% कर दिया गया, जिससे कपड़ो की कीमत स्वमय बढ़ जाएगा, 2500 से अधिक कीमतों के कपड़े में 18% जीएसटी लगा दिया गया जो पूर्व में कम था ,
विजय केशरवानी ने कहा कि इन्षुरेन्स में जीएसटी हटाने से प्रीमियम रेट बढ़ जाएगा क्योंकि पहले जीएसटी का एक भाग इनपुट के रूप में सरकार को मिलती थी जिससे कम्पनी को टैक्स नही देना पड़ता था ,जीएसटी खत्म करने से कम्पनी को जीएसटी देना पड़ेगा जिसकी भरपाई कम्पनी प्रीमियम में वृद्धि कर के करेंगे ,जिसका भार उपभोक्ता पर पड़ेगा,
विजय केशरवानी ने कहा गाय के नाम पर सत्ता पाने वाली भाजपा और उसके हिन्दू संगठन मौन क्यो है? जबकि केंद्र सरकार ने बीफ को जीएसटी से बाहर रखा है अर्थात बीफ पर कोई जीएसटी नही है ,इससे बीफ का निर्यात बढ़ेगा और देश मे गौ माताओं की हत्या में वृद्धि होगी ।
ये भाजपा का असली चेहरा है,
विजय केशरवानीने कहा कि
केंद्र सरकार ने जनता के साथ चालाकी की है ,जीएसटी लागू करने से पहले ही कीमतों में 10% वृद्धि कर दी जैसे पहले बादाम 12% जीएसटी में एक किलो 680 रुपये में मिलता था ,जबकि जीएसटी छूट के बाद एक किलो बादाम की कीमत 790 रुपये की है।
इसीप्रकार 12%जीएसटी पर एक लीटर घी 540 रुपये की थी ,पर जीएसटी छूट के बाद एक लीटर घी कीमत 585 रुपये है ।
ऐसे लगभग सभी वस्तुओं में जादूगरी की गई है ,
जैसे छोटे छोटे खाद्य पदार्थो में चिल्हर में प्रॉब्लम होगी क्योंकि जीएसटी के बाद जो राशि बनती है 4.47 पैसे जिस उस रूप में दिया नही जा सकता।
0 फैक्ट फाइल
भाजपाई उत्सव की ऐसे खुल रही पोल
अभी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों पर सीधा असर आना बाकी है। दुकानदारों का कहना है कि जैसे-जैसे नया स्टॉक आएगा, दाम कम होते चले जाएंगे।
कुछ कंपनियों ने जीएसटी कटौती के ठीक पहले उन्होंने दाम बढ़ा दिए, ताकि टैक्स कम होने के बाद ग्राहकों को लगे कि दाम घट गए हैं, लेकिन उनका मुनाफा बढ़ा ही रहे।
दूसरी दिक्कत छोटे पैकेट वाले खुदरा सामान में आने वाली है। अब एक रुपये की टॉफी का दाम घटकर 88 पैसे हो जाएगा, तो खरीदार यह रेजगारी कहां से लाएगा ? या पांच रुपये वाला बिस्कुट का पैकेट चार रुपये 70 पैसे में मिलेगा, तो कितने लोगों को ये 30 पैसे वापस मिल पाएंगे?
0 जीएसटी में बदलाव का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां और अन्य उत्पादक टैक्स कटौती के मुकाबले दाम किस हद तक घटाती हैं। दूसरे देशों के उदाहरणों से पता चलता है कि ऐसे बदलावों का असर बहुत कठिन हो सकता है। लेकिन इनका असर धीरे-धीरे होता है। विजय केशरवानी अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर

