धर्म नगरी मल्हार में भगवान परशुराम की ऐतिहासिक शोभायात्रा, आस्था -उत्साह और सामाजिक एकता का भव्य प्रदर्शन ।
गणेशदत्त राजू तिवारी कि रिपोर्ट
मल्हार भगवान परशुराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर धर्म नगरी मल्हार में भक्ति और उत्साह का अभूतपूर्व माहौल देखने को मिला। ब्राह्मण परिवार मल्हार के तत्वावधान में एक विशाल एवं भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें मल्हार मस्तुरी, सुकुलकारी लोहर्सी, चिस्दा, वेदपरसदा, जयरामनगर जैतपुर, बेटरी सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, समाज के गणमान्य लोग और युवा वर्ग पूरे जोश के साथ शामिल हुए।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रभावशाली उदाहरण रहा।

शाम 5:00 बजे शोभायात्रा का शुभारंभ डिडिनेश्वरी मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना और जयघोष के साथ किया गया। इसके बाद यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई , सभा स्थल पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भगवान परशुराम के जयकारों और भक्ति गीतों के साथ आगे बढ़ते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
शोभायात्रा के दौरान आकर्षक भगवान परशुराम की झांकियां, धार्मिक ध्वज, पारंपरिक वेशभूषा और अनुशासित व्यवस्था ने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। जगह-जगह स्थानीय लोगों द्वारा जलपान और स्वागत की व्यवस्था की गई, जिससे यह आयोजन एक जन-उत्सव का रूप लेता नजर आया। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा।
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों और युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। युवाओं की ऊर्जा और समर्पण ने आयोजन को नई ऊंचाई दी।

ब्राह्मण परिवार के वरिष्ठ बुजुर्गो सहित युवाओं ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस शोभायात्रा का उद्देश्य समाज में एकता को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना और नई पीढ़ी को अपने धर्म और परंपराओं से जोड़ना है।
समापन स्थल पर पहुंचकर भगवान परशुराम की महा आरती कर वरिष्ठ बुजुर्गो, माताओं, का शाल व श्रीफल देकर सम्मान व होनहार विद्यार्थीयों, और समाज के प्रतिभावान युवक युवतियों को सम्मानित कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया, जहां उपस्थित लोगों ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने और समाज में सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। यह भव्य आयोजन मल्हार नगर में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा, जिसने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता का भी मजबूत संदेश दिया।

