GSS द्वारा ऐतिहासिक (ई.1883 में ) जनसंघर्षों की स्मृति में 18 वे वर्ष सफल “मानवाधिकार स्वाभिमान डोला -यात्रा”एवं सम्मान सभा समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।
जब घोड़ा में बैठने, डोला में बहू ले जाने, मूंछ रखने, पगड़ी पहनने, कथित उच्च वर्ग के घर के सामने जूता/चप्पल पहनने आदि पर कथित हिंदू धार्मिक आदेशों द्वारा शास्त्र सम्मत अनुमति नही था। इनके फरमान के विपरीत जाने पर हत्या कर दिया जाता और आज भी वर्तमान में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से देश के विभिन्न जगहों पर हो रहा है।

तब इन सामंती राजकीय कानून सिध्दांतो के प्रतिरोध में ई.1883 में भुजबल महंत साहब के नेतृत्व में क्रांतिकारी सतनाम आंदोलनकारियों ने बहु-बेटी के इज्जत-सम्मान के लिये डोला प्रथा का ऐतिहासिक जनसंघर्ष कर जीत हासिल किया था। यह घटना इतना प्रसिध्द हुआ था कि, लोकगीतों में भी इसकी गूंज सुनाई देती है। लोकनाचा में ‘ रन खेत माड़गे संगी रे चिरहुला के लड़ाई में रन खेत माड़गे' (अर्थात् सुनो संगी चिरहुला में एक जबरदस्त रन लड़ाई हुआ)। जिसकी याद में प्रतिवर्ष कि भांति, इस वर्ष भी दिनांक - 28 अप्रैल 2025 , दिन - सोमवार को ,इस ऐतिहासिक जनसंघर्षों की स्मृति में गुरुघासीदास सेवादार संघ [GSS] द्वारा 18 वें वर्ष में उक्त डोला यात्रा निकाला गया। मानवाधिकार स्वाभिमान डोला-यात्रियों ने नवलपुर [ढारा] से बेमेतरा होते हुए( यात्रा दौरान जोरों से तूफान ,आंधी और भारी बारिश के साथ ओले पड़ा) नवागढ़ से गाजे– बाजे , फौज पटाखे के साथ पथ –प्रदर्शन - रोड शो करते ,जोश–ख़रोश नारे के साथ निकल पड़े।

यात्रा दौरान जगह–जगह पर , कई गांवों में डोला व यात्रियों का सम्मान एवं नाश्ता, पेयजल का व्यवस्था किया गया था। नवागढ़ के मेन रोड पर राजेश जांगड़े की अगुवाई और साहेब श्री लखन सुबोध के नेतृत्व में कलादास डेहरिया द्वारा क्रांतिकारी गीत के साथ सभा को संबोधित किया गया। यह यात्रा मुंगेली में पहुंचते ही दो लाइनों में कतारबद्ध होकर पथ - प्रदर्शन - रोड शो , नगर भ्रमण करते हुए, सतनाम जैतखाम ग्राम–करही (मुंगेली) पहुंचते ही सभा में तब्दील हो गया। मुख्य व विशिष्ट अतिथियों ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में भारतीय संविधान (आंबेडकरी संविधान) को ख़त्म कर कुछ लोगों द्वारा मनुस्मृति लागू करने का नाकाम कोशिश किया जा रहा है। ऐसे संविधान विरोधियों को सबक सिखाने की ज़रूरत है। जिससे लोकतंत्र को बचाया जा सके। इस कार्यक्रम का अध्यक्षता कर रहे साहेबश्री लखन सुबोध ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि, हमारी संगठन [GSS] गुरुघासीदास व सतनाम आंदोलन के इतिहास का शोध - खोज किया और यह काम 25 वर्षों से जारी है । हम नदी में बहने वाले धार के उलट चलने का काम करते हैं । नदी के धार में बहुत लोग चलते हैं

,लेकिन उसके विपरीत कुछ ही लोग चल पाते हैं और यह काम केवल हमारी संगठन GSS कर रहा है । इसका साफ उदाहरण समाज के बीच गुरुघासीदास, गुरुबालकदास, भुजबल महन्त साहब का डोला प्रथा इतिहास सामने है। डोला यात्रा के सम्माननीय विशिष्ट अतिथि -वक्तागण- *का.तुहीन* (केंद्रीय संयोजक जाति उन्मूलन आंदोलन रायपुर), *श्री वीरेंद्र बोरकर* (यूनाइटेड बुद्धिस्ट सोसाइटी राजनंदगांव), श्री *एम डी सतनाम* (केन्द्रीय संगठक GSS), *मिश्रीलाल खांडे* ( अध्यक्ष SDPS),श्री *नरेन्द्र कुर्रे* (सोशल एक्टिविस्ट बिलाईगढ़),पास्टर *अनिश्चरण* (माइनॉरिटी सोशल एक्टिविस्ट) पास्टर *सुधीशचरण* (सोशल वर्कर बिलासपुर), श्री *रविदास कुर्रे एवं लंबरदार जांगड़े* (सतनाम अमर ज्योति बेलपान तखतपुर), सुश्री *आशा सुबोध* (वरिष्ठ कवित्री वह गीतकार) एवं श्री *कलादास डेहरिया* (रेला सांस्कृतिक टीम लीडर भिलाई) द्वारा क्रांति गीत प्रस्तुत किया और कार्यक्रम संचालन-तामेश्वर अनंत ,सुशील अनंत, गजेंद्र सांडे* द्वारा किया गया। डोला यात्रा अनुशासन - नियंत्रण पायलेटिंग ब्यवस्था में वीरेन्द्र भारद्वाज,मनमोहन बांधे,महेश आर्य, किशोर सोनवानी, केशव सतनाम, रामनारायण भारती, सुकालु कोठारी, भावसिंह चतुर्वेदी, नेतराम खांडे,श्यामचंद मिरी,गुलशन बंजारे, संतोष सोल्डे,नीलेश खांडे,दुष्यंत आर्य, रुद्र आर्य, अविनाश आर्य, मुस्कान आर्य, संगीता मेरी अंकिता आर्य, ईनु खाण्डे,नीतू,* आदि शामिल रहे l विनीत आयोजक मंडल- अनंदराम महिलांगे, संतोषी जांगड़े, भागीरथी पत्रे, गुलाब आर्य, मुकेश टंडन, राधेश्याम बघेल, व्यास मेरी जगदीश पत्रे, रतन मिरे, छत्तेश्वर पत्रे, अशोक महिलांगे, किशोर मिरे, सुनील महिलांगे, रामसिंह सोनवानी, अजीत आर्य, राजिन्दर आर्य* एवं कार्यक्रम मुद्दा समर्थक समस्त जन गण। अंत में रूपदास टंडन (जिला संयोजक मुंगेली) ने आभार व्यक्त करते हुए आह्वान किया और कहा कि यह यात्रा GSS के सेवादारों के अथक मेहनत और प्रयास से संभव हुआ है और यह डोला- यात्रा छत्तीसगढ़ ही नहीं अपितु देश के कोने - कोने तक इसकी गूंज जायेगी

