टेगनमाड़ा शासकीय क्वाटर की हालत जर्जर, संयुक्त कर्मचारी संघ के बिलासपुर संभाग अध्यक्ष सुर्यकांत रजक ने मरम्मत की मांग ।

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टेंगनमाड़ा शासकीय क्वाटर की हालत जर्जर ,
संयुक्त स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बिलासपुर संभाग अध्यक्ष सूर्यकांत रजक ने मरम्म्त की मांग।

मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर टेंगनमाड़ा पीएचसी के शासकीय आवास को मरम्मत किये जाने की मांग की है।

रतनपुर ——– कोटा ब्लॉक के अंतर्गत टेंगनमाड़ा में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बनाए आवास पूरी तरह जर्जर हो चुका है । इस जर्जर आवास में स्वास्थ्य कर्मी रहकर अपनी सेवाएं आदिवासी अंचल में दे रहे हैं। कोटा ब्लॉक के टेंगनमाड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर एक ही स्वास्थ्य केंद्र है। जहाँ आसपास के वनांचल क्षेत्रों के मरीज अपनी इलाज के लिए आश्रित है। जिनकी इलाज की जवाबदारी वहाँ पदस्थ अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मियों पर है। ये स्वास्थ्य कर्मी शासन द्वारा लगभग 8-10 वर्ष पुराने शासकीय आवास में रह कर अपनी सेवाएं दे रहे है। शासकीय आवास का रखरखाव व मरम्मत नहीं होने से आवास की छत की प्लास्टर गिर रहा रही है,पानी टपक रही है , दीवारों में दरारें हैं तथा फ़र्श उखड़ चुका है। कई खिड़कियों पर दरवाजे भी नहीं है । विभाग ने भी पिछले 8-10 वर्षों से इन क्वार्टरों की न मरम्मत कराई है और न ही कोई रखरखाव पर ध्यान दी है

ऐसे में स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिकारी अपना जान जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। मरम्मत के लिए कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को इसकी शिकायत भी की है। शिकायत के बाद भी अधिकारी क्वार्टर का मरम्मत कराने के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं। कर्मचारियों की लगातार इस गम्भीर शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने से संयुक्त स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बिलासपुर संभाग अध्यक्ष सूर्यकांत रजक ने मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर टेंगनमाड़ा पीएचसी के शासकीय आवास को मरम्मत किये जाने की मांग की है।

जीव जंतु व जंगली जानवरों का डर ———–

वनांचल क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों में बने स्टाफ क्वार्टर की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब कई स्वास्थ्य कर्मी व अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में रुकने के बजाय अपने घरों से आने जाने को मजबूर है। इसकी सबसे बड़ी वजह है शासकीय आवास का जर्जर होना जहा रहा कर काम करना कर्मचारियों के लिए किसी बड़े चुनौतियों से काम नहीं है। ऐसे जर्जर आवास में सांप, बिच्छू ,व अन्य जंगली जानवरों का भी आने का खतरा बना रहता है।

मरम्मत करने माँग की गई———-

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टेंगनमाड़ा के शासकीय आवास पूरी तरह जर्जर स्थिति में है। जहाँ हमारे स्वास्थ्य कर्मी रह कर अपनी सेवाएं दे रहे है ऐसी स्थिति में कभी भी स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अप्रिय घटना घट सकती है। जिसे संज्ञान में लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर को पत्र लिखकर जर्जर आवास के मरम्मत की मांग की गई है।

सूर्यकांत रजक,
संभाग अध्यक्ष,
संयुक्त स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

सालों से मरम्मत नहीं शासकीय क्वार्टर की हालत खराब, मजबूरी में रहने मजबूर स्वास्थ्य कर्मी , स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने मरम्मत करने की मांग –

बिलासपुर। कोटा ब्लॉक में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बनाए आवास पूरी तरह जर्जर हो चुका है । इस जर्जर आवास में स्वास्थ्य कर्मी रहकर अपनी सेवाएं आदिवासी अंचल में दे रहे हैं। कोटा ब्लॉक के टेंगनमाड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर एक ही स्वास्थ्य केंद्र है। जहाँ आसपास के वनांचल क्षेत्रों के मरीज अपनी इलाज के लिए आश्रित है। जिनकी इलाज की जवाबदारी वह पदस्थ अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मियों पर है। ये स्वास्थ्य कर्मी शासन द्वारा लगभग 8-10 वर्ष पुराने शासकीय आवास में रह कर अपनी सेवाएं दे रहे है। शासकीय आवास का मरम्मत नहीं होने के कारण आवास की छत टपक रही है, दीवारों में दरारें हैं तथा फ़र्श उखड़ चुका है। कई खिड़कियों पर दरवाजे भी नहीं है । विभाग ने भी पिछले 8-10 वर्षों से इन क्वार्टरों की न मरम्मत कराई है और न ही कोई रखरखाव। ऐसे में स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिकारी अपना जान जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। मरम्मत के लिए कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को इसकी शिकायत भी की है। शिकायत के बाद भी अधिकारी क्वार्टर का मरम्मत कराने के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं। कर्मचारियों की लगातार इस गम्भीर शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने से संयुक्त स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बिलासपुर संभाग अध्यक्ष सूर्यकांत रजक ने मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर टेंगनमाड़ा पीएचसी के शासकीय आवास को मरम्मत किये जाने की मांग की है।

00 खंडहर क्वार्टर में जंगली जानवरों का डर-

वनांचल क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों में बने स्टाफ क्वार्टर की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब कई स्वास्थ्य कर्मी व अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में रुकने के बजाय अपने घरों से आने जाने को मजबूर है। इसकी सबसे बड़ी वजह है शासकीय आवास का जर्जर होना जहा रहा कर काम करना कर्मचारियों के लिए किसी बड़े चुनौतियों से काम नहीं है। ऐसे जर्जर आवास में सांप, बिच्छू ,व अन्य जंगली जानवरों का भी आने का खतरा बना रहता है।

00 संघ ने अफसरों से मरम्मत करने की माँग की है

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टेंगनमाड़ा के शासकीय आवास पूरी तरह जर्जर स्थिति में है। जहाँ हमारे स्वास्थ्य कर्मी रह कर अपनी सेवाएं दे रहे है ऐसी स्थिति में कभी भी स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अप्रिय घटना घट सकती है। जिसे संज्ञान में लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर को पत्र लिखकर जर्जर आवास के मरम्मत की मांग की गई है।

  • सूर्यकांत रजक, संभाग अध्यक्ष, संयुक्त स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

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