मल्हार महोत्सव में बीस लाख उच्च स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन किये जा सकते थे।
गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट
मल्हार: मल्हार महोत्सव 2026 के आयोजन को लेकर जनता के बीच जो सवाल उठ रहे हैं, उसके पीछे की मुख्य वजह प्रशासनिक व्यवस्था और भाजपा नेताओं के बीच आपसी विवाद बताई जा रही है। 8 साल बाद होने वाले इस आयोजन में कई बदलाव देखने को मिले हैं, जिसके कारण मल्हार की जनता में असंतोष है,मल्हार महोत्सव का रंग 28 और 29 मार्च को बिखरा, लेकिन इस बार 3 दिन के बजाय इसे दो दिवसीय कर दिया गया।

भाजपा के स्थानीय नेताओं के बीच आपसी विवाद के कारण प्रशासन को आयोजन की कमान अपने हाथ में लेनी पड़ी।
मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के रूप में नामित शीर्ष नेताओं के व्यस्त होने के कारण उनके आने की संभावना कम थी, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ा। आयोजन को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने एडीएम शिवकुमार बनर्जी को संयोजक बनाया और मस्तूरी SDM को नोडल अधिकारी नियुक्त किया, जिससे आयोजन का स्वरूप बदल गया। 1986 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक महोत्सव को लेकर क्षेत्र की जनता में यह भी मांग उठी थी कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर किया जाए, लेकिन विवादों के कारण इसका स्वरूप सीमित हो गया,
विवादों के बावजूद, मल्हार के मेला ग्राउंड में लोक कला और शास्त्रीय संगीत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें करमा, डंडा और पंथी नृत्य के साथ नितिन दुबे और सुनील सोनी जैसे कलाकार शामिल हैं!
मल्हार महोत्सव में रूपये 20 लाख के बड़े बजट के बावजूद छोटे मंच और साधारण कार्यक्रमों का उपयोग संसाधनों के कुप्रबंधन का संकेत देता है। इतनी महत्वपूर्ण राशि से स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाले उच्च स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन किए जा सकते थे, जिससे पर्यटन और कलाकारों को बड़ा मंच मिलता।

बड़ा बजट: ₹20 लाख।
छोटी प्रस्तुति छोटे मंच का उपयोग।उच्च गुणवत्ता वाले राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को बुलाया जा सकता था।राशि का सदुपयोग कर महोत्सव को यादगार बनाया जा सकता था, लेकिन मंच निराशाजनक रहा
यह स्थिति सरकारी आयोजनों में योजना के अभाव को दर्शाती है।

